कोलकाता, 29 अगस्त (Udaipur Kiran) । बंगाल के प्रवासी श्रमिकों के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश से एक बड़ी उम्मीद जगी है। काेर्ट का यह फैसला देश में मेहनत और त्याग कर रहे परिवारों के लिए आशा का संदेश है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें न्यायालय ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान काेलकाता उच्च न्यायालय को पश्चिम बंगाल के प्रवासी श्रमिकों की याचिकाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनने का निर्देश दिया है।
इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने साेशल मीडिया एक्स पर कहा कि उच्चतम न्यायालय का यह कदम बंगाल की अनूठी पहचान और भूमिका को राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति देता है। इससे राज्य की ऐतिहासिक भूमिका को मान्यता मिली है। उन्होंने लिखा कि मैं अपने प्रवासी श्रमिक भाइयों-बहनों के साथ मजबूती से खड़ी हूं। न्यायपालिका पर विश्वास जताते हुए उन्हाेंने कहा कि बंगाल के हर श्रमिक को सम्मान, गरिमा और संवैधानिक न्याय मिलेगा।
ममता बनर्जी ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय का यह फैसला न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे देश के उन लाखों प्रवासी श्रमिकों के लिए उम्मीद की किरण माना जा रहा है, जो बेहतर जीवन की तलाश में दूर-दराज के राज्यों में काम कर रहे हैं।
उच्चतम न्यायालय ने राज्य के ऐतिहासिक और मानवीय भूमिका को स्वीकार करते हुए यह माना कि बंगाल ने दशकों से शरण, सहारा और सांस्कृतिक आश्रय के रूप में प्रवासी श्रमिकों व उनके परिवारों को संबल दिया है। न्यायालय का यह फैसला फिलहाल विभिन्न स्थानों पर कठिन परिस्थितियों में फंसे और कई बार कानूनी उलझनों का सामना कर रहे श्रमिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।———————
(Udaipur Kiran) / ओम पराशर
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